बुधवार, 7 मई 2025

SEBI full form in Hindi

SEBI - The Securities & Exchange Board of India
 SEBI का हिन्दी में पूरा नाम है - भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड.



SEBI के गठन का मुख्य उद्धेश्य :-

SEBI के गठन का मकसद क्रेडिट रेटिंग एजेंसयों जैसे क्रिसिल,इक्रा के लिए डिस्क्लोजर नियम तय करना, स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए नियम निर्धारित करना व इन कंपनियों में निवेश करने वाले निवेशकों के हितों का ध्यान रखना है।भारतीय बाजार में निवेश करने हेतु एफआईआई( फॉरेन इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स ) या जिन्हें हिंदी में विदेशी संस्थागत निवेशक कहते हैं,को भी आरबीआई के पास रजिस्ट्रेशन करवाने के साथ-साथ सेबी में भी रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है।

 सेबी संस्था का निर्माण वैसे तो 1988 में ही हो गया था लेकिन इसे वैधानिक मान्यता 12 अप्रैल 1992 को दी गयी थी।
 वर्त्तमान में दिनांक 02 मार्च 2025 से इसके चेयरमेन श्री तुहीन कांत पांडे हैं। 



सेबी का मुख्य कार्यालय मुम्बई में है। इसके अलावा सेबी के चार क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं:-
 1.उत्तरी क्षेत्रीय कार्यालय - नई दिल्ली.
2.पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय - कोलकाता.
3.दक्षिणी क्षेत्रीय कार्यालय - चेन्नई.
4.पश्चिम क्षेत्रीय कार्यालय - अहमदाबाद

 सेबी संस्था 9 सदस्यों द्वारा संचालित होती है। जिसमें एक चेयरमेन जो भारत सरकार द्वारा नामित किया जाता है और दो सदस्य भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधिकारी, एक सदस्य रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया से एवं 5 अन्य सदस्य जिनमें 2 अल्पकालिक और तीन पूर्णकालिक (whole time member) सदस्य भारत सरकार द्वारा नामित किये जाते हैं।

भारतीय स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कोई भी कंपनी के विरुद्ध यदि आप कोई शिकायत करना चाहते हैं तो आप सेबी के टोल फ्री नं 1800 66 7575 या 1800 22 7575 पर सुुुबह 9 बजे से शाम 6 बजे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा सेबी की https:// www.sebi.gov.in या https://investor.sebi.gov.in
या https://scores.gov.in पर भी शिकायत कर सकते हैं। SEBI सात दिन के अंदर आपकी शिकायतें संबंधित कंपनी को पहुंचा देती हैं।

Postal address of SEBI --


SEBI के मुख्यालय मुम्बई कार्यालय का पता है ~
सेबी भवन, प्लॉट संख्या C-7, "जी" ब्लॉक, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, बांद्रा (पूर्व ), मुम्बई 400051

SEBI का ईमेल पता - 

sebi@sebi.gov.in

स्टॉक ब्रोकर SEBI रजिस्टर्ड है या नहीं यह कैसे पता करें ?

- SEBI की वेबसाइट sebi.gov.in पर जाएं।
-वहां आपको बिलकुल नीचे बहुत  सारे ऑप्शंस में Recognised Intermediaries मिलेगा। उसे सेलेक्ट करें।
- नाम या रजिस्ट्रेशन नंबर पता टाइप करें। Go पर क्लिक करें।
रिजल्ट में आपको आपके ब्रोकर का पूरा नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर,कॉन्टैक्ट डिटेल्स, मिल जाएंगे।
ब्रोकर द्वारा दी गई जानकारी से इसका मिलान करें और ब्रोकर सही है या नहीं, पता करें।
 

सोमवार, 22 जुलाई 2024

Full form of JCB in Hindi

 Full form of JCB - Joseph Cyril Bamford




हममें से सभी लोगों ने जेसीबी मशीन देखी है। यह एक बहुत  भारी दिखने वाली, खुदाई करने, मलबा ढोनेऔर कृषि, भवन निर्माण व साफ-सफाई के काम में ली जाती है।

 वास्तव में जेसीबी किसी मशीन का नाम नहीं लेकिन हम सब इसे बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल करने लगे हैं। 

JCB नाम एक ब्रिटिश मेकेनिक Joseph  Cyril Bamford के नाम का संक्षिप्त रूप है।

 जोसेफ ब्रिटेन में खेती और बड़े निर्माण कार्यों के लिए बहुत ही उपयुक्त मशीन बना कर बेचते थे।

बाद में। उनकी बनाई मशीनों की मांग बढ़ने पर उन्होंने ज्यादा संख्या में मशीनें बनाना प्रारंभ किया और एक कंपनी Joseph Cyril Bamford Excavators Ltd बनाई।

ये मशीनें दुनिया में इतनी फेमस हुई कि हर देश इनका उपयोग करने लगा और JCB नाम सबकी जबान पर चढ़ गया।

JCB कंपनी का मुख्यालय कहां है ?

JCB कंपनी का मुख्यालय Rocester, England में स्थित है।

JCB मशीन का रंग पीला क्यों होता है ?

 जेसीबी मशीनों का रंग पीला होने का मुख्य कारण सुरक्षा और दृश्यता है। निर्माण स्थलों पर, जहां धूल, मलबा और भारी मशीनरी होती है, पीला रंग आसानी से दिखाई देता है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम कम होता है। यह रंग दूर से ध्यान आकर्षित करता है और कम रोशनी या खराब मौसम में भी मशीन को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।पहले जेसीबी मशीनें लाल रंग से पुती  हुई होती थी लेकिन इससे धूल, मलबे से भरी जगह पर इसको देखने में ही मुश्किल आती थी। तब इसका रंग पीला कर दिया गया।अब तो पीला रंग जेसीबी के ब्रांड पहचान का हिस्सा बन गया है। कंपनी ने इसे अपने उपकरणों के लिए मानक रंग के रूप में अपनाया, जिससे यह बाजार में उनकी मशीनों को तुरंत पहचानने योग्य बनाता है। यह एक तरह से उनकी ब्रांडिंग रणनीति भी है।



सोमवार, 1 जुलाई 2024

Full form of ED in Hindi with details


 






पिछले कुछ वर्षों में कई हाई प्रोफाइल मामलों की जांच होने के सिलसिले में ED का नाम अक्सर मिडिया में आता रहता है। VVIP हेलिकॉप्टर मामला, रॉबर्ट वाड्रा का विदेशी सम्पत्ति मामला, वित्त मंत्री पी चिदम्बरम और उनके पुत्र कार्ति के खिलाफ INX मिडिया केस में बेहिसाब संपत्ति रखने का मामला, विजय माल्या व नीरव मोदी के धन-शोधन (money laundering) मामले की जांच ED द्वारा ही की गई थी।
23 जुलाई 2025 को ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म MYNTRA द्वारा 1654 करोड़ रु. के FEMA नियम उल्लंघन करने के लिए ED ने कंपनी के विरुद्ध केस दर्ज किया है।

 ED का अंग्रेजी में पूरा नाम है:- Directorate of Enforcement या Directorate General of Economic Enforcement. हिन्दी में इसे प्रवर्तन निदेशालय के नाम से जाना जाता है।
प्रवर्तन निदेशालय की स्थापना 1 मई 1956 को की गई थी और यह केंद्रीय राजस्व विभाग एवं वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। इसका मुख्यालय दिल्ली है। ED में सभी उच्च अधिकारियों की पदस्थापना अनिवार्यतः IAS, IPS या IRS रैंक के अधिकारियों में से ही की जाती है।

 ED के मुख्य कार्य हैं :-
1. विदेशी विनिमय प्रबन्धन अधिनियम foreign Exchange Management Act 1999 (FEMA) के अंतर्गत विदेशी मुद्रा विनिमय विधियों व नियमों के उल्लंघन की जांच करने के साथ-साथ आरोपियों को दंड देने का अधिकार भी ED के पास है।
2. भारत में आर्थिक अपराध एवं आर्थिक नियमों को लागू करना, काला धन जब्त करने में पुलिस की सहायता करना।
3. Prevention of  Money Laundering Act PMLA 2002 धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत आपराधिक गतिविधियों से अर्जित संपत्ति का पता लगाने हेतु जांच करना व उसके उपरांत उन संपत्तियों को जब्त करने/ कुर्क करने और धन शोधन में लिप्त अपराधियों पर मुकदमा चलाने का अधिकार भी ED के पास है।
पहले धन-शोधन की रोकथाम से जुड़े मौजूदा प्रावधानों के तहत जब्त या कुर्क की गई परिसंपत्तियों की वैध अवधि 90 दिन थी।लेकिन 1 फरवरी 2019 को पेश 2019-20 के अंतरिम बजट में इस अवधि को बढ़ाकर 365 दिन कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से ईडी जाँच एजेंसी को सबूत इकट्ठा करने और आर्थिक अपराधी का जुर्म साबित करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।

ED के उच्चतम अधिकारी को प्रवर्तन निदेशक कहते हैं। ED के 5 मुख्य कार्यालय हैं : मुम्बई,चेन्नई,चंडीगढ़ कोलकाता व दिल्ली।
ED के 16 क्षेत्रीय कार्यालय हैं : अहमदाबाद,बेंगलुरु, चंडीगढ़,चेन्नई,कोच्चि,दिल्ली,पणजी,गुवाहाटी, हैदराबाद,जयपुर,जालंधर,कोलकाता,लखनऊ,मुंबई, पटना और श्रीनगर। क्षेत्रीय कार्यालय प्रमुख को संयुक्त निदेशक कहा जाता है।
ED के 11 उप क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं : भुबनेश्वर, कोजीकोड,इंदौर,मदुरै,नागपुर, प्रयागराज,रायपुर, देहरादून, रांची, सूरत व शिमला।इनके प्रमुख अधिकारी को उप-निदेशक कहा जाता है।

ED के मुख्य निदेशक कौन हैं ?

 अभी ED के मुख्य निदेशक राहुल नवीन हैं। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा 14 अगस्त 2024 को दो वर्ष के लिए की गई है।

ईडी के निदेशक का कार्यकाल कितनी अवधि का होता है ?


केंद्रीय सतर्कता आयोग  एक्ट 2003 के अनुसार ईडी के निदेशक का कार्यकाल दो साल का होता था पर 14 नवम्बर 2021 को केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) 2021 नामक अध्यादेश जारी हुआ है। इसके बाद अब ईडी के निदेशक का कार्यकाल पांच साल हो जाएगा। ईडी के निदेशक को कुछ अपवाद छोड़कर पद से नहीं हटाया जा सकता है।
 

उम्मीद है, आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी। यदि आप CAG का फुल फॉर्म और इसके बारे में जानना चाहते हैं तो नीचे दिए लिंक को कॉपी करिए -
https://togetfullforms.blogspot.com/2019/02/cag-full-form-in-hindi.html


बुधवार, 5 जून 2024

POP full form in Hindi



 

   POP का अर्थ है - प्लास्टर ऑफ पेरिस

POP full form - Plaster Of Paris

प्लास्टर ऑफ पेरिस नाम से सभी परिचित हैं। यह सफेद रंग का महीन पाउडर होता है जो बिल्डिंग मटेरियल, मूर्तियां, सजावटी सामान, चिकित्सा और कलाकृतियां बनाने में काम आता है। हड्डी टूटने पर बांधा जाने वाला प्लास्टर इसीका बना होता है। हालांकि POP से बना प्लास्टर वजन में अत्यंत भारी होता है इसलिए मॉडर्न आर्थोपेडिक चिकित्सा पद्धति में आजकल मरीज को फाइबरगलास और थर्मोप्लास्टिक मटेरियल से बने प्लास्टर चढ़ाये जाते हैं।

प्लास्टर ऑफ पेरिस कैसे बनाते हैं ?

प्लास्टर ऑफ पेरिस जिप्सम ( CaSO4.1/2 H2O ) नामक खनिज पदार्थ से बनाया जाता है।

पेरिस में जिप्सम की बहुत सी खदाने हैं  इसीलिए इसका नाम "प्लास्टर ऑफ पेरिस" पड़ा।

 जिप्सम को ऊंचे तापमान पर लगभग 1500 से 1800 डिग्री तक गर्म किया जाता है जिससे यह निर्जलित ( dehydrate ) होकर सफेद पदार्थ में बदल जाता है। इसे मशीन में पिसकर पाउडर बनाया जाता है।

प्लास्टर ऑफ पेरिस को जब पानी में घोला जाता है तो इसको सांचे में ढाल कर मूर्तियां आदि बनाई जा सकती है। लेकिन यह पानी सोख कर बहुत जल्दी कड़ा हो जाता है इसलिए इसको तुरंत ही काम में लेना पड़ता है।

सोमवार, 3 जून 2024

Full form of NABARD

NABARD का फुल फॉर्म National Bank for Agriculture and Rural Development है। हिंदी में  इसे "राष्ट्रीय ग्रामीण एवं कृषि विकास बैंक" कहा जाता है।


NABARD की स्थापना कब हुई थी ?


नाबार्ड की स्थापना 1981 में बनाई गई शिवरामन समिति की सिफारिश के आधार पर 22 जुलाई 1982 को 100 करोड़ रुपये की प्रदत्त यानि पेड अप पूंजी के साथ की गई थी। सन् 2010 में नाबार्ड की प्रदत्त पूंजी 2000 करोड़ रूपये थी।

नाबार्ड कृषि व ग्रामीण विकास से जुडी संस्थाओं को ऋण प्रदान करने वाली एक शीर्ष संस्था है। ऋण देने के लिए नाबार्ड को भारत सरकार, विश्व बैंक और दूसरी अन्य एजेंसी से समय समय पर वित्त उपलब्ध करवाया जाता है। नाबार्ड दूसरे सरकारी बैंक व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को भी ऋण प्रदान करती है ताकि ये बैंक कृषि,लघु उद्योग, कुटीर एवं ग्रामोद्योग तथा हस्तशिल्प आदि को ऋण उपलब्ध करा सके।

NABARD के चैयरमेन कौन हैं ?


दिसंबर 2022 से शाजी के वी को नाबार्ड का चेयरमेन बनाया गया है। इससे पहले श्री जी आर चिंतल इस पद पर कार्यरत थे। 

NABARD के कार्यालय कहां-कहां पर हैं ?


नाबार्ड का मुख्य कार्यालय मुम्बई में स्थित है। यह अपने 28 क्षेत्रीय कार्यालय जो सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित हैं, के माध्यम से देश भर में वित्त पोषण के साथ -साथ फसल खरीद का कार्य करती है।
नाबार्ड का एक उप कार्यालय पोर्ट ब्लेयर में भी है। इसके अतिरिक्त 336 जिला कार्यालय की सहायता से यह देश के प्रत्येक हिस्से में अपनी उपस्थिति बनाये हुए है।

बुधवार, 12 जुलाई 2023

LAC & LOC full form


  LAC और LOC 


LAC, LOC और अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा ये वो उन तीन तरह की सरहदों के नाम हैं जिनसे भारत का नाता बहुत पुराना है। आपने यह तीनों नाम सुने तो होंगे लेकिन कई लोग इन रेखाओं की असल परिभाषा से परिचित नहीं हैं। आइए आपको बताते हैं कि क्या हैं इन तीनों रेखाओं या बॉर्डर के मायने।

 LAC और LOC दोनों मिलते-जुलते शब्द हैं। जिनमें कन्फ्यूजन होना  स्वाभाविक है

लेकिन ये दोनों शब्द काफी अलग अर्थ रखते हैं।

LOC 
LOC का मतलब Line Of Control (लाइन ऑफ कंट्रोल या नियंत्रण रेखा)।


 

                                                     

LOC नियंत्रण रेखा भारत और पाकिस्तान के बीच खिंची गई 740 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है। यह रेखा दोनों देशों के बीच पिछले 50 वर्षों से विवाद का विषय बनी हुई है। यह नियंत्रण रेखा भारत और पाकिस्तान के बीच खिंची गई सीमा रेखा है। यह भारत के जम्मू कश्मीर और POK Pakistan Occupied Kashmir तक फैली है।इसकी लंबाई 776 किलोमीटर है।  वर्तमान नियंत्रण रेखा यहां 1947 में दोनों देशों के बीच हुए युद्ध को विराम देकर तत्कालीन नियंत्रण स्थिति पर खिंची गई थी, जो आज भी लगभग वैसी ही है। तब कश्मीर के कई भागों में पाकिस्तान ने आक्रमण कर दिया था और भारतीय सेनाएं कश्मीर की सुरक्षा हेतु आगे आई थीं। 

पाकिस्तान ने 21-22 अक्टूबर 1947 को भारत अधिकृत कश्मीर पर हमला कर दिया। इसे उसने "ऑपरेशन गुलमर्ग" नाम दिया। इस हमले में जम्मू-कश्मीर के 35000 से 40000 लोग मारे गए। 

इतना ही नहीं 26 अक्टूबर को फिर से बारामुला पर आक्रमण करके वहां के 11000 रहवासियों को मार डाला। श्रीनगर में बिजली आपूर्ति करने वाले मोहरा बिजली स्टेशन को नष्ट कर दिया।इसके बाद शेख अब्दुल्ला ने 1948 में संयुक्त राष्ट्र united nations को पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर में किये नरसंहार के बारे में बताया। 

संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध विराम करवा कर दोनों देशों के बीच नियंत्रण रेखा LOC बनवाई।

उत्तरी भाग में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को कारगिल सेक्टर से पीछे श्रीनगर-लेह राजमार्ग तक पछाड़ दिया था।1965 में पाकिस्तान ने फिर आक्रमण किया किन्तु लड़ाई में गतिरोध उत्पन्न हुआ, जिसके चलते यथास्थिति 1971 तक बनी रही। 1971 में बांग्लादेश युद्ध के उत्तर में पाकिस्तान ने फिर कश्मीर पर आक्रमण किया जिससे नियंत्रण रेखा के दोनों ओर दोनों ही देशों ने एक दूसरे की चौकियों पर नियंत्रण किया था। भारत को नियंत्रण रेखा के उत्तरी भाग में लद्दाख क्षेत्र से लगभग 300 वर्ग मील भूमि मिली थी। 3 जुलाई, 1972 में शिमला समझौते के परिणामस्वरूप शांतिवार्ता के बाद नियंत्रण रेखा को बहाल किया गया


LAC - Line of Actual Control (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल या वास्तविक नियंत्रण रेखा)

नियंत्रण रेखा से अलग, वास्तविक नियंत्रण रेखा भारत और चीन के बीच की वास्तविक सीमा रेखा है। यह रेखा भारत के नियंत्रित क्षेत्र व चीन नियंत्रित क्षेत्र रेखा को अलग करती है। LAC को लेकर भारत व चीन दोनों की धारणा अलग है। भारत LAC की लंबाई 3488 किलोमीटर मानता है जबकि चीन इसकी लंबाई 2000 किलोमीटर मानता है। यह सीमा रेखा जम्मू-कश्मीर में भारत अधिकृत क्षेत्र और चीन अधिकृत क्षेत्र अक्साई चीन को पृथक करती है। यह लद्दाख, कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है। यह भी एक प्रकार की सीज फायर (युद्धविराम) रेखा ही है क्योंकि 1962 के भारत-चीन युद्घ के बाद दोनों देशों की सेनाएं जहां तैनात थी, उसे वास्तविक नियंत्रण रेखा मान लिया गया।

चीन अक्सर LAC रेखा को लेकर विवाद करता रहता है व सीमा पर अपनी सेनाओं का जमावड़ा करके भारत की सुरक्षा को चुनौती देता हुआ सीमा लांघने की कोशिशें करता रहता है।

LAC क्षेत्र पर पहाड़, नदियां, ग्लेशियर और बर्फीले रेगिस्तान हैं।


अंतरराष्ट्रीय सीमा  international border

अंतरराष्ट्रीय सीमा दो देशों के बीच की वो सीमा रेखा  होती है जिसको लेकर उन देशों सहित दुनिया के बाकी देशों ने अपनी सहमति जताई है। जैसे ब्रिटेन और तिब्बत के बीच 1914 के शिमला समझौते के तहत जो सीमारेखा खिंची गई थी वो आज भारत और चीन के बीच मौजूद सीमा रेखा भी है। जबकि अगस्त 1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच खिंची गई अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा को रेडक्लिफ लाइन के नाम से जाना जाता है।