G I का मतलब Geographical Indication tag.
जब कोई स्थान और वहां बहुतायत से मिलने वाली या बनने वाली वस्तु का आपस में घनिष्ठ संबंध हो जाता है तो ऐसी वस्तु को GI tag देकर उस वस्तु और स्थान की महत्ता को सुरक्षित किया जाता है।
जैसे दार्जलिंग का नाम चाय के साथ, कोल्हापुर का नाम चप्पल के साथ जुड़ गया।
GI टैग मिलने से उन उत्पादों को एक विशिष्ट पहचान मिलती है साथ ही उसकी प्रमाणिकता का पुष्टिकरण होता है। GI टैग मिलने से उत्पादों को दुनिया के प्रत्येक कोने में पहुंचाने और अधिक मूल्य दिलाने में मदद मिलती है।
ये टैग किन वस्तुओं को मिल सकता है ?
GI टैग किसी खाद्य वस्तु, दैनिक उपयोग वाली वस्तु जैसे चप्पल, कपड़े ,चाय, फल और मेवे और कोई अन्य वस्तु को मिल सकता है।
भारत में GI टैग किस एक्ट के अंतर्गत आता है ?
भारत में GI टैग जियोग्राफिकल इंडिकेशन, 1999 के अंतर्गत आता है और भारत सरकार इस एक्ट के नियमों के हिसाब से GI TAG देती है।
GI टैग में कितनी वस्तुएं हैं ?
मार्च 2029 तक भारत में 822 वस्तुओं को GI tag मिल चुका है और आगे यह संख्या बढ़ती रहेगी।
सबसे पहला टैग किस वस्तु को मिला था?
सबसे पहला टैग भारत में दार्जलिंग की चाय को 2004 में मिला था।
सबसे अधिक GI TAG किस राज्य के पास है ?
उत्तर प्रदेश के पास सबसे अधिक GI TAG वाले 77 उत्पाद हैं। दूसरे नंबर पर तमिल नाडु आता है
GI tag का मुख्यालय कहां है?
चेन्नई तमिल नाडु में GI tag का मुख्यालय है।
दुनिया का पहला GI TAG वाला उत्पाद कौनसा है ?
ROCKFORT CHEES रोकफोर्ट पनीर जो फ्रांस का एक उत्पाद है, उसे 1955 में पहला GI TAG मिला था।
GI टैग किसी व्यक्ति को मिल सकता है ?
इसका उत्तर है, नहीं।
GI टैग किसी संस्था, संगठन या राज्य और केंद्र सरकार को ही मिलता है।
GI टैग एक तरह से किसी खास नाम पर अपने अधिकार जैसा है। यह 10 वर्ष के लिए वैध रहता है। दस वर्ष बाद पुनः इसको नवीनीकरण करवाना होता है। यदि नहीं कराया तो दूसरा कोई भी उसका दुरुपयोग कर सकता है।