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OPEC - Organisation of Petroleum Exporting Countries.
प्रमुख तेल उत्पादक देशों का समूह
स्थापना वर्ष : सन् 2016.
इससे पहले सितंबर 1960 में OPEC की शुरुआत बगदाद में ईरान ,इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला ने की थी। अभी ओपेक में 12 देश हैं जिनके नाम इस प्रकार हैं-
- मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) : ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात।
- संयुक्त अरब अमीरात 01मई 2026 से OPEC और OPEC+से अलग हो रहा है।
- अफ्रीका : अल्जीरिया, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, गैबॉन, लीबिया, नाइजीरिया।
- दक्षिण अमेरिका : वेनेजुएला।
OPEC+में 11 और देश शामिल हैं। इससे गैर-OPEC देश भी वैश्विक तेल नीति में भाग लेते हैं। यह गठबंधन दुनिया के 41% कच्चे तेल का उत्पादन नियंत्रित करता है। हाल ही में OPEC के 8 देशों ने सितंबर 2025 से उत्पादन 5,47,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है।
विश्व का करीब 80% तेल OPEC देशों के पास है
ओपेक का मुख्यालय कहां है ?
OPEC का मुख्यालय ऑस्ट्रिया, वियना में है।
OPEC+ समूह में कौनसे देश हैं ?
ओपेक+संगठन में कुल 11सदस्य देश हैं। ये सभी देश तेल उत्पादन नहीं करते हैं लेकिन तेल उत्पादन, इसकी कीमत आदि निर्धारित करने में इन देशों का सहयोग OPEC लेता है।
OPEC+के 11सदस्य देश हैं -
अज़रबैजान, बहरीन, ब्रुनेई, ब्राजील, कजाकिस्तान, मलेशिया, मैक्सिको, ओमान, रूस, दक्षिण सूडान और सूडान।
यूएई का OPEC संगठन से अलग होने के क्या कारण हैं ?
UAE संयुक्त अरब अमीरात ओपेक का बहुत पुराना और एक अहम सदस्य रहा है। खाड़ी के तेल उत्पादक देशों में यह तीसरा सबसे बड़ा देश है।अब इसने OPEC और OPEC+ से बाहर निकलने की घोषणा कर दी है।
उसका फैसला 01मई 2026 से लागू माना जायेगा।
यूएई ने ओपेक छोड़ने का कारण ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से विश्व में तेल,पेट्रोलियम पदार्थो और एलपीजी की कीमतें बढ़ने को बताया है।
यूएई के ऊर्जा मंत्री सुहैल अल मजरूई (Suhail Al Mazrouei) ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध से तेल की कीमतें अस्थिर हो गई हैं और सभी देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है अतः भविष्य में वह तेल की कीमतें स्थिर रखना चाहता है और तेल उत्पादन बढ़ा कर इसमें मदद करेगा।
