मंगलवार, 10 मार्च 2026

CPI full form in Hindi


 CPI -CPI Stands for Consumer Price Index


हिन्दी में CPI का मतलब - उपभोक्ता मूल्य सूचकांक
इंग्लिश में CPI का अर्थ - Consumer Price Index
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक CPI का सरल। शब्दों में अर्थ है कि जो कीमत किसी वस्तु खरीदने के लिए आम जन भुगतान करते हैं, वह CPI कहलाती है।

CPI के आंकड़े कौनसा विभाग जारी करता है ?


भारत में सीपीआई के आंकड़े "सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय MoSPI  (Ministry of Statistics and Programme Implementation of India) द्वारा प्रत्येक माह की 12तारीख या अगले कार्यदिवस पर शाम को 4.00 बजे जारी होते हैं।


दिनांक 21 अक्टूबर 2020 से CPI (I W) 
का बेस ईयर 2001 से बदल कर 2016 किया गया था। अब केंद्र ने CPI का आधार वर्ष 2024 कर दिया है।
साथ ही CPI 2024 के अंतर्गत महंगाई के आंकड़े तीन स्तर पर जारी होंगे। ग्रामीण, शहरी व सम्मिलित।
अब से सीपीआई के आंकड़े देश के साथ अलग-अलग राज्यों के लिए भी जारी होंगे।
यह बदलाव श्रम ब्यूरो द्वारा किया गया। ज्ञात हो, श्रम ब्यूरो (Labour Bureau) भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय Ministry of Labour & Employment के अधीन कार्य करता है।
श्रम ब्यूरो द्वारा अब यह तय किया गया है कि CPI (IW) का आधार वर्ष हर 5 साल में बदला जाएगा।
बाजार की स्थिति और उपभोक्ता की पसंद- नापसन्द के आधार पर सीपीआई का निर्धारण किया जाएगा।
सीपीआई के बेस ईयर में बदलाव का सीधा लाभ पेंशनर्स, सरकारी कर्मचारी एवं फैक्ट्री वर्कर्स को होगा। 
CPI में यह  बदलाव CPI for Industrial Workers CPI (IW) में किया गया है।

CPI मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं:
1. 
1. औद्योगिक श्रमिकों (Industrial Workers-IW) के लिये CPI 
2. कृषि मज़दूर (Agricultural Labourer-AL) के लिये CPI
3. ग्रामीण मज़दूर (Rural Labourer-RL) के लिये CPI
4. CPI (ग्रामीण/शहरी/संयुक्त)


 






रविवार, 1 मार्च 2026

Full form of WPI


WPI (Whole Sale Price Index)
 

हिंदी में - थोक मूल्य सूचकांक


  1. थोक मूल्य सूचकांक WPI की व्याख्या सीधे शब्दों में की जाए तो यह वह कीमत होती है जो थोक बाजार में एक व्यापारी दूसरे व्यापारी से वसूलता है.

  2.  WPI का आंकलन प्रति सप्ताह ऑफिस ऑफ़ इकॉनामिक एडवाइजर करती है जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आता है.WPI की गणना के लिए
  3. एक base year (आधार वर्ष) तय किया जाता है जो फिलहाल 2011-12 है. इसको बदलकर अब 2022-23 किया जा रहा है।
  4.  इस गणना में कुल 697 वस्तुएं सम्मिलित हैं,  इन सभी को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता हैं:–
  • 1.प्राथमिक वस्तु (primary articles):— दाल, चावल, सब्जियाँ इत्यादि. इसका वेटेज 22.62% है.

  • 2. निर्माण उत्पाद (manufactured articles):—पेय पदार्थ,तम्बाकू व इससे निर्मित उत्पाद,लकड़ी व इससे निर्मित सामान,रासायनिक उत्पाद, धातु उत्पाद, खाद्य उत्पाद, कपड़े,कागज व इससे निर्मित उत्पादन, रबर और इससे निर्मित उत्पाद. इसका वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है.

  • 3. इंधन (तेल, बिजली, कोयला) :--- इसका वेटेज 13.15% है.
रासायनिक उत्पाद में कार्बन और उसके यौगिक, एसिड, सोडा, सोडा ऐश, ऑक्सीजन, जिंक ऑक्साइड आदि आते हैं.
खाद्येत्तर वस्तुओं में- रुई, जूट, ऊन, सिल्क, फाइबर आदि आते हैं.

WPI की सूची में उन वस्तुओं को ऊपर
 रखा जाता है जिनके prices महत्त्वपूर्ण हैं. उदाहरण के लिए, WPI प्राथमिक वस्तु में सर्वप्रथम खाद्य वस्तुएँ (दाल-चावल आदि) फिर खाद्येत्तर …फिर जाकर खनिज के prices-level को रखा जाता है. दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि खाद्य वस्तुओं के दाम को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है. यह प्राथमिकता, उपभोक्ताओं के द्वारा किसी विशेष वस्तु पर किये जा रहे खर्च पर निर्भर करता है. जिस प्रकार की वस्तु पर अधिक खर्च किया जाता है,के वह सूची में ऊपर दिखेगा और कम उपयोगी वस्तुओं के वर्ग का नाम नीचे आएगा.
2012 तक सरकार द्वारा जारी मुद्रा- स्फीति के आंकड़े WPI पर ही आधारित होते थे लेकिन 2013 से मुद्रा-स्फीति का आंकलन CPI के आधार पर निर्धारित होता है.

WPI कैसे निकाला जाता है ?

WPI निकालने के लिए बेस ईयर की सहायता ली जाती है। सन् 2017 से WPI मापने के आधार वर्ष 2011-12 है. अब मान लें आपको दालों का WPI पता करना है. इसके लिए सन् 2011-12 के दौरान दालों की कीमतें जानना होगी. मान लीजिए उस समय दालों की कीमत 40 रुपये प्रति किलो थी. अभी 2020 में यह बढ़कर 90 रुपये प्रति किलो हो गई तो मूल्य में बढ़ोतरी 50 रुपये प्रति किलो हुई. इसे हमको प्रतिशत के रूप में बदलना होगा.
40 रुपये पर 50 रुपए की वृद्धि
100 रुपये पर 125 रुपये की वृद्धि
अतः WPI 100 + 125 =225 
दालों के लिए सन् 2020 में WPI 225 है.
15 जून 2026 से सरकार प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स PPI लागू करने जा रही है. अगले 5सालों में यह WPI की जगह प्रयुक्त किया जाएगा.
PPI में पहली बार वस्तुओं के साथ, बैंकिंग और रेलवे जैसी सेवाओं को भी शामिल किया जाएगा. इसका आधार वर्ष 2022-23 होगा. इसके अलावा PPI में सौर और पवन ऊर्जा जैसे नए उत्पाद भी शामिल किए जाएंगे.