शनिवार, 6 जून 2026

FSSAI full form in Hindi


FSSAI full form is Food Safety & Standards Authority of India
FSSAI अर्थात भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण

FSSAI भारत में पैक्ड प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और पौष्टिकता की जांच व उन पर नियंत्रण करने वाली सर्वोच्च संस्था है।

FSSAI स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय Ministry of Health & Family Welfare के अधीन कार्य करता है।

FSSAI क्या करता है ?

अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह जरूरी है कि हम जो भोजन करते हैं वह स्वादिष्ट तो हो साथ में शुद्ध, पौष्टिक और मिलावट रहित भी हो।




FSSAI ने जुलाई 2027 से सभी खाद्य विगन उत्पादों के पैकेट पर vegan लोगो दिखाना अनिवार्य कर दिया है। यह लोगो सिर्फ FSSAI द्वारा स्वीकृत खाद्य उत्पाद ही उपयोग कर सकेंगे।
VEGAN उत्पाद वे खाद्य पदार्थ होते हैं जिनमें दूध और दूध से बने अन्य डेयरी उत्पादों, दही, पनीर आदि का इस्तेमाल नहीं होता है। इनमें पशुओं से नहीं केवल पौधों से निर्मित उत्पाद ही शामिल होते हैं।
एफएसएसएआई ने एक और निर्देश जारी किया है कि अब से होटलों दुकानों में कोई भी भोजन या नाश्ता अखबार में लपेटकर नहीं दिया जा सकता है।
FSSAI ने एक और आदेश जारी कर खाद्य पदार्थो की पैकेजिंग में धातु की स्टेपल पिन के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई है क्योंकि कई बार ये पिनें खाद्य पदार्थों में गिरकर लोगों के शरीर में पहुंच जाती है।



मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

OPEC full form in Hindi

   
                       LOGO
  

 OPEC - Organisation of Petroleum Exporting Countries.
प्रमुख तेल उत्पादक देशों का समूह

स्थापना वर्ष : सन् 2016. 

इससे पहले सितंबर 1960 में OPEC की शुरुआत बगदाद में ईरान ,इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला ने की थी। अभी ओपेक में 12 देश हैं जिनके नाम इस प्रकार हैं-

  • मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) : ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात।
  • संयुक्त अरब अमीरात 01मई 2026 से OPEC और OPEC+से अलग हो रहा है।
  • अफ्रीका : अल्जीरिया, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, गैबॉन, लीबिया, नाइजीरिया।
  • दक्षिण अमेरिका : वेनेजुएला।

 OPEC+में 11 और देश शामिल हैं। इससे गैर-OPEC देश भी वैश्विक तेल नीति में भाग लेते हैं। यह गठबंधन दुनिया के 41% कच्चे तेल का उत्पादन नियंत्रित करता है। हाल ही में OPEC के 8 देशों ने सितंबर 2025 से उत्पादन 5,47,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है।

विश्व का करीब 80% तेल OPEC देशों के पास है


ओपेक का मुख्यालय कहां है ?

OPEC का मुख्यालय ऑस्ट्रिया, वियना में है।

OPEC+ समूह में कौनसे देश हैं ?

ओपेक+संगठन में कुल 11सदस्य देश हैं। ये सभी देश तेल उत्पादन नहीं करते हैं लेकिन तेल उत्पादन, इसकी कीमत आदि निर्धारित करने में इन देशों का सहयोग OPEC लेता है।

OPEC+के 11सदस्य देश हैं -

अज़रबैजान, बहरीन, ब्रुनेई, ब्राजील, कजाकिस्तान, मलेशिया, मैक्सिको, ओमान, रूस, दक्षिण सूडान और सूडान

यूएई का OPEC संगठन से अलग होने के क्या कारण हैं ? 

UAE संयुक्त अरब अमीरात ओपेक का बहुत पुराना और एक अहम सदस्य रहा है। खाड़ी के तेल उत्पादक देशों में यह तीसरा सबसे बड़ा देश है।अब इसने OPEC और OPEC+ से बाहर निकलने की घोषणा कर दी है।

उसका फैसला 01मई 2026 से लागू माना जायेगा।

यूएई ने ओपेक छोड़ने का कारण ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से विश्व में तेल,पेट्रोलियम पदार्थो और एलपीजी की कीमतें बढ़ने को बताया है।

यूएई के ऊर्जा मंत्री सुहैल अल मजरूई (Suhail Al Mazrouei) ने कहा कि  ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध से तेल की कीमतें अस्थिर हो गई हैं और सभी देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है अतः भविष्य में वह तेल की कीमतें स्थिर रखना चाहता है और तेल उत्पादन बढ़ा कर इसमें मदद करेगा।



मंगलवार, 10 मार्च 2026

CPI full form in Hindi


 CPI -CPI Stands for Consumer Price Index


हिन्दी में CPI का मतलब - उपभोक्ता मूल्य सूचकांक
इंग्लिश में CPI का अर्थ - Consumer Price Index
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक CPI का सरल। शब्दों में अर्थ है कि जो कीमत किसी वस्तु खरीदने के लिए आम जन भुगतान करते हैं, वह CPI कहलाती है।

CPI के आंकड़े कौनसा विभाग जारी करता है ?


भारत में सीपीआई के आंकड़े "सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय MoSPI  (Ministry of Statistics and Programme Implementation of India) द्वारा प्रत्येक माह की 12तारीख या अगले कार्यदिवस पर शाम को 4.00 बजे जारी होते हैं।


दिनांक 21 अक्टूबर 2020 से CPI (I W) 
का बेस ईयर 2001 से बदल कर 2016 किया गया था। अब केंद्र ने CPI का आधार वर्ष 2024 कर दिया है।
साथ ही CPI 2024 के अंतर्गत महंगाई के आंकड़े तीन स्तर पर जारी होंगे। ग्रामीण, शहरी व सम्मिलित।
अब से सीपीआई के आंकड़े देश के साथ अलग-अलग राज्यों के लिए भी जारी होंगे।
यह बदलाव श्रम ब्यूरो द्वारा किया गया। ज्ञात हो, श्रम ब्यूरो (Labour Bureau) भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय Ministry of Labour & Employment के अधीन कार्य करता है।
श्रम ब्यूरो द्वारा अब यह तय किया गया है कि CPI (IW) का आधार वर्ष हर 5 साल में बदला जाएगा।
बाजार की स्थिति और उपभोक्ता की पसंद- नापसन्द के आधार पर सीपीआई का निर्धारण किया जाएगा।
सीपीआई के बेस ईयर में बदलाव का सीधा लाभ पेंशनर्स, सरकारी कर्मचारी एवं फैक्ट्री वर्कर्स को होगा। 
CPI में यह  बदलाव CPI for Industrial Workers CPI (IW) में किया गया है।

CPI मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं:
1. 
1. औद्योगिक श्रमिकों (Industrial Workers-IW) के लिये CPI 
2. कृषि मज़दूर (Agricultural Labourer-AL) के लिये CPI
3. ग्रामीण मज़दूर (Rural Labourer-RL) के लिये CPI
4. CPI (ग्रामीण/शहरी/संयुक्त)


 






रविवार, 1 मार्च 2026

Full form of WPI


WPI (Whole Sale Price Index)
 

हिंदी में - थोक मूल्य सूचकांक


  1. थोक मूल्य सूचकांक WPI की व्याख्या सीधे शब्दों में की जाए तो यह वह कीमत होती है जो थोक बाजार में एक व्यापारी दूसरे व्यापारी से वसूलता है.

  2.  WPI का आंकलन प्रति सप्ताह ऑफिस ऑफ़ इकॉनामिक एडवाइजर करती है जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आता है.WPI की गणना के लिए
  3. एक base year (आधार वर्ष) तय किया जाता है जो फिलहाल 2011-12 है. इसको बदलकर अब 2022-23 किया जा रहा है।
  4.  इस गणना में कुल 697 वस्तुएं सम्मिलित हैं,  इन सभी को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता हैं:–
  • 1.प्राथमिक वस्तु (primary articles):— दाल, चावल, सब्जियाँ इत्यादि. इसका वेटेज 22.62% है.

  • 2. निर्माण उत्पाद (manufactured articles):—पेय पदार्थ,तम्बाकू व इससे निर्मित उत्पाद,लकड़ी व इससे निर्मित सामान,रासायनिक उत्पाद, धातु उत्पाद, खाद्य उत्पाद, कपड़े,कागज व इससे निर्मित उत्पादन, रबर और इससे निर्मित उत्पाद. इसका वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है.

  • 3. इंधन (तेल, बिजली, कोयला) :--- इसका वेटेज 13.15% है.
रासायनिक उत्पाद में कार्बन और उसके यौगिक, एसिड, सोडा, सोडा ऐश, ऑक्सीजन, जिंक ऑक्साइड आदि आते हैं.
खाद्येत्तर वस्तुओं में- रुई, जूट, ऊन, सिल्क, फाइबर आदि आते हैं.

WPI की सूची में उन वस्तुओं को ऊपर
 रखा जाता है जिनके prices महत्त्वपूर्ण हैं. उदाहरण के लिए, WPI प्राथमिक वस्तु में सर्वप्रथम खाद्य वस्तुएँ (दाल-चावल आदि) फिर खाद्येत्तर …फिर जाकर खनिज के prices-level को रखा जाता है. दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि खाद्य वस्तुओं के दाम को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है. यह प्राथमिकता, उपभोक्ताओं के द्वारा किसी विशेष वस्तु पर किये जा रहे खर्च पर निर्भर करता है. जिस प्रकार की वस्तु पर अधिक खर्च किया जाता है,के वह सूची में ऊपर दिखेगा और कम उपयोगी वस्तुओं के वर्ग का नाम नीचे आएगा.
2012 तक सरकार द्वारा जारी मुद्रा- स्फीति के आंकड़े WPI पर ही आधारित होते थे लेकिन 2013 से मुद्रा-स्फीति का आंकलन CPI के आधार पर निर्धारित होता है.

WPI कैसे निकाला जाता है ?

WPI निकालने के लिए बेस ईयर की सहायता ली जाती है। सन् 2017 से WPI मापने के आधार वर्ष 2011-12 है. अब मान लें आपको दालों का WPI पता करना है. इसके लिए सन् 2011-12 के दौरान दालों की कीमतें जानना होगी. मान लीजिए उस समय दालों की कीमत 40 रुपये प्रति किलो थी. अभी 2020 में यह बढ़कर 90 रुपये प्रति किलो हो गई तो मूल्य में बढ़ोतरी 50 रुपये प्रति किलो हुई. इसे हमको प्रतिशत के रूप में बदलना होगा.
40 रुपये पर 50 रुपए की वृद्धि
100 रुपये पर 125 रुपये की वृद्धि
अतः WPI 100 + 125 =225 
दालों के लिए सन् 2020 में WPI 225 है.
15 जून 2026 से सरकार प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स PPI लागू करने जा रही है. अगले 5सालों में यह WPI की जगह प्रयुक्त किया जाएगा.
PPI में पहली बार वस्तुओं के साथ, बैंकिंग और रेलवे जैसी सेवाओं को भी शामिल किया जाएगा. इसका आधार वर्ष 2022-23 होगा. इसके अलावा PPI में सौर और पवन ऊर्जा जैसे नए उत्पाद भी शामिल किए जाएंगे.