सोमवार, 1 जुलाई 2024

Full form of ED in Hindi with details


 






पिछले कुछ वर्षों में कई हाई प्रोफाइल मामलों की जांच होने के सिलसिले में ED का नाम अक्सर मिडिया में आता रहता है। VVIP हेलिकॉप्टर मामला, रॉबर्ट वाड्रा का विदेशी सम्पत्ति मामला, वित्त मंत्री पी चिदम्बरम और उनके पुत्र कार्ति के खिलाफ INX मिडिया केस में बेहिसाब संपत्ति रखने का मामला, विजय माल्या व नीरव मोदी के धन-शोधन (money laundering) मामले की जांच ED द्वारा ही की गई थी।
23 जुलाई 2025 को ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म MYNTRA द्वारा 1654 करोड़ रु. के FEMA नियम उल्लंघन करने के लिए ED ने कंपनी के विरुद्ध केस दर्ज किया है।

 ED का अंग्रेजी में पूरा नाम है:- Directorate of Enforcement या Directorate General of Economic Enforcement. हिन्दी में इसे प्रवर्तन निदेशालय के नाम से जाना जाता है।
प्रवर्तन निदेशालय की स्थापना 1 मई 1956 को की गई थी और यह केंद्रीय राजस्व विभाग एवं वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। इसका मुख्यालय दिल्ली है। ED में सभी उच्च अधिकारियों की पदस्थापना अनिवार्यतः IAS, IPS या IRS रैंक के अधिकारियों में से ही की जाती है।

 ED के मुख्य कार्य हैं :-
1. विदेशी विनिमय प्रबन्धन अधिनियम foreign Exchange Management Act 1999 (FEMA) के अंतर्गत विदेशी मुद्रा विनिमय विधियों व नियमों के उल्लंघन की जांच करने के साथ-साथ आरोपियों को दंड देने का अधिकार भी ED के पास है।
2. भारत में आर्थिक अपराध एवं आर्थिक नियमों को लागू करना, काला धन जब्त करने में पुलिस की सहायता करना।
3. Prevention of  Money Laundering Act PMLA 2002 धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत आपराधिक गतिविधियों से अर्जित संपत्ति का पता लगाने हेतु जांच करना व उसके उपरांत उन संपत्तियों को जब्त करने/ कुर्क करने और धन शोधन में लिप्त अपराधियों पर मुकदमा चलाने का अधिकार भी ED के पास है।
पहले धन-शोधन की रोकथाम से जुड़े मौजूदा प्रावधानों के तहत जब्त या कुर्क की गई परिसंपत्तियों की वैध अवधि 90 दिन थी।लेकिन 1 फरवरी 2019 को पेश 2019-20 के अंतरिम बजट में इस अवधि को बढ़ाकर 365 दिन कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से ईडी जाँच एजेंसी को सबूत इकट्ठा करने और आर्थिक अपराधी का जुर्म साबित करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।

ED के उच्चतम अधिकारी को प्रवर्तन निदेशक कहते हैं। ED के 5 मुख्य कार्यालय हैं : मुम्बई,चेन्नई,चंडीगढ़ कोलकाता व दिल्ली।
ED के 16 क्षेत्रीय कार्यालय हैं : अहमदाबाद,बेंगलुरु, चंडीगढ़,चेन्नई,कोच्चि,दिल्ली,पणजी,गुवाहाटी, हैदराबाद,जयपुर,जालंधर,कोलकाता,लखनऊ,मुंबई, पटना और श्रीनगर। क्षेत्रीय कार्यालय प्रमुख को संयुक्त निदेशक कहा जाता है।
ED के 11 उप क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं : भुबनेश्वर, कोजीकोड,इंदौर,मदुरै,नागपुर, प्रयागराज,रायपुर, देहरादून, रांची, सूरत व शिमला।इनके प्रमुख अधिकारी को उप-निदेशक कहा जाता है।

ED के मुख्य निदेशक कौन हैं ?

 अभी ED के मुख्य निदेशक राहुल नवीन हैं। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा 14 अगस्त 2024 को दो वर्ष के लिए की गई है।

ईडी के निदेशक का कार्यकाल कितनी अवधि का होता है ?


केंद्रीय सतर्कता आयोग  एक्ट 2003 के अनुसार ईडी के निदेशक का कार्यकाल दो साल का होता था पर 14 नवम्बर 2021 को केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) 2021 नामक अध्यादेश जारी हुआ है। इसके बाद अब ईडी के निदेशक का कार्यकाल पांच साल हो जाएगा। ईडी के निदेशक को कुछ अपवाद छोड़कर पद से नहीं हटाया जा सकता है।
 

उम्मीद है, आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी। यदि आप CAG का फुल फॉर्म और इसके बारे में जानना चाहते हैं तो नीचे दिए लिंक को कॉपी करिए -
https://togetfullforms.blogspot.com/2019/02/cag-full-form-in-hindi.html


बुधवार, 5 जून 2024

POP full form in Hindi



 

   POP का अर्थ है - प्लास्टर ऑफ पेरिस

POP full form - Plaster Of Paris

प्लास्टर ऑफ पेरिस नाम से सभी परिचित हैं। यह सफेद रंग का महीन पाउडर होता है जो बिल्डिंग मटेरियल, मूर्तियां, सजावटी सामान, चिकित्सा और कलाकृतियां बनाने में काम आता है। हड्डी टूटने पर बांधा जाने वाला प्लास्टर इसीका बना होता है। हालांकि POP से बना प्लास्टर वजन में अत्यंत भारी होता है इसलिए मॉडर्न आर्थोपेडिक चिकित्सा पद्धति में आजकल मरीज को फाइबरगलास और थर्मोप्लास्टिक मटेरियल से बने प्लास्टर चढ़ाये जाते हैं।

प्लास्टर ऑफ पेरिस कैसे बनाते हैं ?

प्लास्टर ऑफ पेरिस जिप्सम ( CaSO4.1/2 H2O ) नामक खनिज पदार्थ से बनाया जाता है।

पेरिस में जिप्सम की बहुत सी खदाने हैं  इसीलिए इसका नाम "प्लास्टर ऑफ पेरिस" पड़ा।

 जिप्सम को ऊंचे तापमान पर लगभग 1500 से 1800 डिग्री तक गर्म किया जाता है जिससे यह निर्जलित ( dehydrate ) होकर सफेद पदार्थ में बदल जाता है। इसे मशीन में पिसकर पाउडर बनाया जाता है।

प्लास्टर ऑफ पेरिस को जब पानी में घोला जाता है तो इसको सांचे में ढाल कर मूर्तियां आदि बनाई जा सकती है। लेकिन यह पानी सोख कर बहुत जल्दी कड़ा हो जाता है इसलिए इसको तुरंत ही काम में लेना पड़ता है।

सोमवार, 3 जून 2024

Full form of NABARD

NABARD का फुल फॉर्म National Bank for Agriculture and Rural Development है। हिंदी में  इसे "राष्ट्रीय ग्रामीण एवं कृषि विकास बैंक" कहा जाता है।


NABARD की स्थापना कब हुई थी ?


नाबार्ड की स्थापना 1981 में बनाई गई शिवरामन समिति की सिफारिश के आधार पर 22 जुलाई 1982 को 100 करोड़ रुपये की प्रदत्त यानि पेड अप पूंजी के साथ की गई थी। सन् 2010 में नाबार्ड की प्रदत्त पूंजी 2000 करोड़ रूपये थी।

नाबार्ड कृषि व ग्रामीण विकास से जुडी संस्थाओं को ऋण प्रदान करने वाली एक शीर्ष संस्था है। ऋण देने के लिए नाबार्ड को भारत सरकार, विश्व बैंक और दूसरी अन्य एजेंसी से समय समय पर वित्त उपलब्ध करवाया जाता है। नाबार्ड दूसरे सरकारी बैंक व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को भी ऋण प्रदान करती है ताकि ये बैंक कृषि,लघु उद्योग, कुटीर एवं ग्रामोद्योग तथा हस्तशिल्प आदि को ऋण उपलब्ध करा सके।

NABARD के चैयरमेन कौन हैं ?


दिसंबर 2022 से शाजी के वी को नाबार्ड का चेयरमेन बनाया गया है। इससे पहले श्री जी आर चिंतल इस पद पर कार्यरत थे। 

NABARD के कार्यालय कहां-कहां पर हैं ?


नाबार्ड का मुख्य कार्यालय मुम्बई में स्थित है। यह अपने 28 क्षेत्रीय कार्यालय जो सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित हैं, के माध्यम से देश भर में वित्त पोषण के साथ -साथ फसल खरीद का कार्य करती है।
नाबार्ड का एक उप कार्यालय पोर्ट ब्लेयर में भी है। इसके अतिरिक्त 336 जिला कार्यालय की सहायता से यह देश के प्रत्येक हिस्से में अपनी उपस्थिति बनाये हुए है।

बुधवार, 12 जुलाई 2023

LAC & LOC full form


  LAC और LOC 


LAC, LOC और अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा ये वो उन तीन तरह की सरहदों के नाम हैं जिनसे भारत का नाता बहुत पुराना है। आपने यह तीनों नाम सुने तो होंगे लेकिन कई लोग इन रेखाओं की असल परिभाषा से परिचित नहीं हैं। आइए आपको बताते हैं कि क्या हैं इन तीनों रेखाओं या बॉर्डर के मायने।

 LAC और LOC दोनों मिलते-जुलते शब्द हैं। जिनमें कन्फ्यूजन होना  स्वाभाविक है

लेकिन ये दोनों शब्द काफी अलग अर्थ रखते हैं।

LOC 
LOC का मतलब Line Of Control (लाइन ऑफ कंट्रोल या नियंत्रण रेखा)।


 

                                                     

LOC नियंत्रण रेखा भारत और पाकिस्तान के बीच खिंची गई 740 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है। यह रेखा दोनों देशों के बीच पिछले 50 वर्षों से विवाद का विषय बनी हुई है। यह नियंत्रण रेखा भारत और पाकिस्तान के बीच खिंची गई सीमा रेखा है। यह भारत के जम्मू कश्मीर और POK Pakistan Occupied Kashmir तक फैली है।इसकी लंबाई 776 किलोमीटर है।  वर्तमान नियंत्रण रेखा यहां 1947 में दोनों देशों के बीच हुए युद्ध को विराम देकर तत्कालीन नियंत्रण स्थिति पर खिंची गई थी, जो आज भी लगभग वैसी ही है। तब कश्मीर के कई भागों में पाकिस्तान ने आक्रमण कर दिया था और भारतीय सेनाएं कश्मीर की सुरक्षा हेतु आगे आई थीं। 

पाकिस्तान ने 21-22 अक्टूबर 1947 को भारत अधिकृत कश्मीर पर हमला कर दिया। इसे उसने "ऑपरेशन गुलमर्ग" नाम दिया। इस हमले में जम्मू-कश्मीर के 35000 से 40000 लोग मारे गए। 

इतना ही नहीं 26 अक्टूबर को फिर से बारामुला पर आक्रमण करके वहां के 11000 रहवासियों को मार डाला। श्रीनगर में बिजली आपूर्ति करने वाले मोहरा बिजली स्टेशन को नष्ट कर दिया।इसके बाद शेख अब्दुल्ला ने 1948 में संयुक्त राष्ट्र united nations को पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर में किये नरसंहार के बारे में बताया। 

संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध विराम करवा कर दोनों देशों के बीच नियंत्रण रेखा LOC बनवाई।

उत्तरी भाग में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को कारगिल सेक्टर से पीछे श्रीनगर-लेह राजमार्ग तक पछाड़ दिया था।1965 में पाकिस्तान ने फिर आक्रमण किया किन्तु लड़ाई में गतिरोध उत्पन्न हुआ, जिसके चलते यथास्थिति 1971 तक बनी रही। 1971 में बांग्लादेश युद्ध के उत्तर में पाकिस्तान ने फिर कश्मीर पर आक्रमण किया जिससे नियंत्रण रेखा के दोनों ओर दोनों ही देशों ने एक दूसरे की चौकियों पर नियंत्रण किया था। भारत को नियंत्रण रेखा के उत्तरी भाग में लद्दाख क्षेत्र से लगभग 300 वर्ग मील भूमि मिली थी। 3 जुलाई, 1972 में शिमला समझौते के परिणामस्वरूप शांतिवार्ता के बाद नियंत्रण रेखा को बहाल किया गया


LAC - Line of Actual Control (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल या वास्तविक नियंत्रण रेखा)

नियंत्रण रेखा से अलग, वास्तविक नियंत्रण रेखा भारत और चीन के बीच की वास्तविक सीमा रेखा है। यह रेखा भारत के नियंत्रित क्षेत्र व चीन नियंत्रित क्षेत्र रेखा को अलग करती है। LAC को लेकर भारत व चीन दोनों की धारणा अलग है। भारत LAC की लंबाई 3488 किलोमीटर मानता है जबकि चीन इसकी लंबाई 2000 किलोमीटर मानता है। यह सीमा रेखा जम्मू-कश्मीर में भारत अधिकृत क्षेत्र और चीन अधिकृत क्षेत्र अक्साई चीन को पृथक करती है। यह लद्दाख, कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है। यह भी एक प्रकार की सीज फायर (युद्धविराम) रेखा ही है क्योंकि 1962 के भारत-चीन युद्घ के बाद दोनों देशों की सेनाएं जहां तैनात थी, उसे वास्तविक नियंत्रण रेखा मान लिया गया।

चीन अक्सर LAC रेखा को लेकर विवाद करता रहता है व सीमा पर अपनी सेनाओं का जमावड़ा करके भारत की सुरक्षा को चुनौती देता हुआ सीमा लांघने की कोशिशें करता रहता है।

LAC क्षेत्र पर पहाड़, नदियां, ग्लेशियर और बर्फीले रेगिस्तान हैं।


अंतरराष्ट्रीय सीमा  international border

अंतरराष्ट्रीय सीमा दो देशों के बीच की वो सीमा रेखा  होती है जिसको लेकर उन देशों सहित दुनिया के बाकी देशों ने अपनी सहमति जताई है। जैसे ब्रिटेन और तिब्बत के बीच 1914 के शिमला समझौते के तहत जो सीमारेखा खिंची गई थी वो आज भारत और चीन के बीच मौजूद सीमा रेखा भी है। जबकि अगस्त 1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच खिंची गई अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा को रेडक्लिफ लाइन के नाम से जाना जाता है।

गुरुवार, 21 जुलाई 2022

Full form of LPG, CNG, LNG & PNG in Hindi



CNG का फुल फार्म- Compressed Natural Gas

LPG का फुल फार्म - Liquified Petroleum Gas

LNG का फुल फार्म - Liquified Natural Gas

PNG का फुल फार्म- Pipelined Natural Gas

CBG का फुल फॉर्म- Compressed Bio Gas

CNG फुल फॉर्म
- CNG गैस को हिंदी में संपीडित गैस कहते हैं। CNG में मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है। मीथेन को जब बहुत अधिक दाब के साथ संग्रहित किया जाता है तो वह CNG कहलाती है।
 CNG का उपयोग रिक्शा चलाने में किया जा रहा है। यह एलपीजी गैस के मुकाबले अधिक सुरक्षित है। क्योंकि CNG हवा से काफी हल्की होती है। यदि वह लीक होती है तो फौरन हवा में मिल जाती है। इसके अलावा CNG दूसरी गैसों की अपेक्षा हानिकारक गैसों का उत्सर्जन कम मात्रा में करती है। इसीलिए CNG को क्लीन गैस भी कहा जाता है।एक अनुमान के अनुसार पेट्रोल वाहनों में CNG इस्तेमाल करने से 56% ईधन खर्च बचता है वहीं डीजल वाहनों में CNG का इस्तेमाल करने से 32 % ईधन खर्च में कमी आती है। भविष्य में CNG का प्रयोग लगातार बढ़ने की आशा है।

LPG फुल फार्म - LPG का फुल फार्म लिक्विफाईड पेट्रोलियम गैस है। पेट्रोल का उत्पादन करते समय LPG एक बाय- प्रोडक्ट के रूप में प्राप्त होती है। यह हवा से भारी होती है व इसके संपर्क में आते ही तुरंत आग पकड़ती है, इसलिए हम अक्सर LPG गैस सिलेंडर में विस्फोट और आग लगने की खबरें सुनते हैं।
वास्तव में एलपीजी हाइड्रोकार्बन गैसों प्रोपेन, ब्यूटेन और आईसोब्यूटेन गैस के ग्रुप का एक सामान्य नाम है। इसे हम सब रसोई गैस के नाम से जानते हैं। LPG मुख्यतः घरों में भोजन बनाने व वाहन चलाने में काम आती है। रेफ्रिजरेटर में उपयोग होने वाली क्लोरोफ्लोरो कार्बन नाम की गैस के स्थान पर भी आजकल एलपीजी का प्रयोग होने लगा है। क्लोरोफ्लोरो कार्बन गैस से पृथ्वी का कवच मानी जाने वाली ओजोन पर्त को नुकसान पहुंचता है जिसके कारण सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रा वॉयलेट किरणें पृथ्वी पर ज्यादा मात्रा में आ जाती हैं। एलपीजी गैस से ओजोन पर्त को कोई हानि नहीं होती है।
वर्ष 2016 में देश में रसोई गैस (LPG) की पहुंच 62% लोगों तक थी जो 2019 तक 90% तक पहुंच गई है। यह संख्या 2014 में 55% थी। यहां यह भी बताना जरूरी है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है। आगे सन् 2025 तक LPG की मांग 34% बढ़ने का अनुमान है। 

LNG फुल फार्म- LNG का फुल फार्म लिक्विफाईड नेचुरल गैस है। हिंदी में इसे द्रवीकृत प्राकृतिक गैस कहते हैं। LNG एक प्रकार से मीथेन गैस ही है जिसे लगभग -260 डिग्री फेरनहाइट तक ठंडा किया जाता है जिससे इसका घनत्व सिकुड़ कर काफी कम हो जाता है ताकि इसको स्टोर करने व ट्रांसपोर्टेशन में आसानी हो।

PNG फुल फार्म - PNG का फुल फार्म Pipelined Natural Gas पाइपलाईंड नेचुरल गैस है। यह CNG गैस ही है। बस दोनों में इतना अंतर है कि पाइपलाईंड नेचुरल गैस की सप्लाय घरों में ईंधन के रूप में पाइप द्वारा की जाती है।

CBG फुल फॉर्म - Compressed Bio Gas कम्प्रेस्ड बॉयोगैस 
यह एक नए तरह का ईंधन है, जो कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और सीएनजी जैसे फ्यूल पर निर्भरता को कम कर सकता है। इससे कॉर्बन का भी उत्सर्जन नहीं होगा।
CBG मुख्य रूप से जैविक अपशिष्ट जैसे गोबर, खाद्य अपशिष्ट, कृषि अवशेष और विशेषकर नगर पालिका के कचरा-वाहन का कचरा आदि से बनाई जाने वाली गैस है।
इसका उपयोग भोजन बनाने, बिजली उत्पादन, वाहनों के ईंधन के रूप में किया जा रहा है।

रासायनिक दृष्टि से, सीबीजी और सीएनजी दोनों एक ही हैं - दोनों ही संपीड़ित मीथेन हैं और इनका कैलोरी मान भी समान है।
अंतर यह है कि सीएनजी पेट्रोलियम का उप-उत्पाद है, जबकि सीबीजी किसी भी बायोमास से उत्पादित किया जा सकता है।
सीएनजी की तरह, सीबीजी को भी सिलेंडर या पाइपलाइन के माध्यम से आम उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जा सकता है।

 


शुक्रवार, 8 जुलाई 2022

Full form of PIN code in Hindi


हम लोग भारत में जो भी डाक पोस्ट ऑफिस के माध्यम से प्राप्त करते हैं या कोई पत्र,पार्सल और रजिस्ट्री आदि डाक द्वारा अन्य स्थान पर भेजते हैं, तो डाक पर पते के साथ शहर का नाम और 6 अंकों वाला एक नम्बर जरूर लिखते हैं। इस 6 अंकों वाले नम्बर को ही PIN Code (पिन कोड) कहा जाता है। PIN Code पोस्टल इंडेक्स नंबर (पिन) का संक्षिप्त नाम है।
PIN Code छः अंकों की नम्बर प्रणाली है जो भारतीय डाक विभाग द्वारा प्रयोग की जाती है।

भारत के डाक विभाग में पिन कोड प्रणाली की शुरुआत कब की गई ?


भारत में डाक वितरण करने वाले अनेक डाक घर हैं। डाक घरों को बहुत ज्यादा संख्या में प्रतिदिन डाक प्राप्त होती है। डाक की छंटाई में आसानी हो इसके लिए 15 अगस्त 1972 को पिन कोड की शुरुआत की गई।

 देश के प्रत्येक डाक घर को एक विशिष्ठ नम्बर या कोड आवंटित किया गया है। पिन कोड प्रणाली लागू करने हेतु सम्पूर्ण भारत को 8 भौगोलिक क्षेत्र में बांटा गया है। नवां क्षेत्र आर्मी पोस्टल क्षेत्र है।
पिन कोड के छः अंकों में से पहला अंक किसी विशेष राज्य या क्षेत्र को दर्शाता है। दूसरा अंक उपक्षेत्र या पोस्टल सर्कल को बताता है। तीसरा अंक राज्य के जिले को इंगित करता है। अंतिम तीन अंक उस विशेष पोस्ट ऑफिस को दर्शाता है जहां पत्र का वितरण होना है। नीचे विभिन्न राज्यों के PIN CODE इंगित करता हुआ भारत का नक्शा दिया गया है।


यहां एक तालिका दी गई है जिसमें 1 से 8 तक नम्बर से सम्बंधित क्षेत्र और राज्य दर्शाये गए हैं।
1. उत्तरी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश।
2 .उत्तरी उत्तर प्रदेश,और उत्तराखंड।
3. पश्चिमी राजस्थान और गुजरात।
4. पश्चिमी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मप्र।
5. दक्षिणी आंध्र प्रदेश और कर्नाटक।
6. दक्षिणी केरल एवं तमिलनाडु।
7. पूर्वी प. बंगाल और ओडिशा।
8. पूर्वी बिहार और झारखण्ड।
9. आर्मी पोस्टल सेवा।

राज्यों के पिन कोड 

अब हम पिन कोड के शुरू के दो नंबरों के बारे में जानते हैं। 11 नंबर दिल्ली का है, 12-13 हरियाणा, 14-16 पंजाब, 17 हिमाचल प्रदेश, 18 और 19 जम्मू और काश्मीर, 20-28 उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल के लिए, 30-34 राजस्थान, 36-39 गुजरात, 40-44 महाराष्ट्र, 45-49 मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़, 50-53 आंध्र प्रदेश, 56-59 कर्नाटक, 60-64 तमिलनाड़ु, 67-69 केरल, 70-74 बंगाल, 75-77 ओडिशा, 78 असम, 79 नॉर्थ ईस्टर्न इलाके, 80-85 बिहार और झारखंड, 90-99 आर्मी पोस्टल सर्विसेज।

पिन कोड के अगले 3 डिजिट उस क्षेत्र की जानकारी देते हैं जहां आपका सामान पहुंचना है। इसका मतलब है उस ऑफिस में जहां आपका सामान जाएगा। एक बार आपका सामान सही पोस्ट ऑफिस तक पहुंच गया तो वहां से यह आपके घर तक पहुंचाया जाता है।

आज के जमाने में सभी लोग ई मेल से पत्र व्यवहार करते हैं इसलिए चिट्ठी का महत्व कम हो गया है और उसके साथ ही पिन कोड का भी। पर फिर भी पिन कोड तो सदा ही अस्तित्व में रहेगा।